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Tuesday, 24 May 2011

"अनोखी पिकनिक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मेरी गर्मियों की छुटियाँ!

    आज से 34 साल पुरानी बात है। मेरे विवाह को यही कोई दो साल हुए थे। मैं उन दिनों जिला-बिजनौर के हल्दौर कस्बे मे अपनी डॉक्टरी की प्रैक्टिस करता था।
एक वर्ष पहले मेरा अपनी पत्नी से किसी बात को लेकर मतभेद हो गया था और वो मायके मे चली गयी थी। मैं भी काफी ऐंठ में था। वहीं पर मेरे बड़े पुत्र का जन्म हुआ था। एक साल गुजर जाने पर जब नया साल आया तो श्रीमती जी का नववर्ष का बधाईपत्र मिला। उसपर नाम तो किसी का नहीं था मगर लेख से आभास हुआ कि यह तो अपनी सजनी का ही भेजा हुआ है।
    थोड़े दिन तो मन को मजबूत बनाया मगर कुछ दिन वाद वो पिघल गया। तभी श्रीमती जी का सन्देश किसी के द्वारा आ गया कि मुझे आकर ले जाओ।
    उन दिनों मैंने नई राजदूत मोटरसाईकिल ले ली थी। जैसे ही अप्रैल का महीना आया मैं बाइक से हल्दौर से अपनी ससुराल (रुड़की) के लिए रवाना हो गया।
    उन दिनों पत्नी से खुलेआम बात करना असभ्यता माना जाता था। अतः उससे बात न हो सकी। मगर शाम को मेरी पत्नी की सहेली मुझे अपने घर बुला कर ले गई। वहाँ पर मेरी श्रीमती जी भी थीं। खूब बाते हुईं और सारे गिले-शिकवे दूर हो गये। तभी पत्नी ने कहा कि मेरे माता-पिता मुझे आपके साथ भेजने में सहमत नहीं हैं। मैं आपके साथ (नीटू) बेटे को बाजार भेजूँगी और आप उसे लेकर सीधे हल्दौर चले जाना। बाकी मैं सम्भाल लूँगी।
अगले दिन ऐसा ही हुआ। मैं अपने डेढ़ साल के पुत्र को लेकर हल्दौर के लिए उड़न-छू हो गया। तीन घंटे का मोटरसाईकिल का सफर था। थोड़ी देर में इस बालक को नींद आने लगी। तब मैंने अपनी बुशर्ट निकालकर उसे अपने से बाँध लिया और घर आ गया।
    हमारे घर में तो मानों दीवाली की खुशियाँ ही आ गई थीं। मगर उधर मातम पसर गया था। अब तो ससुरालवालों को आना ही था। वो मिन्नते करने लगे कि भारती को ले आओ। कुछ नखरे करने के बाद मैं भी मान गया। मानना तो था ही क्योंकि यह तो हम पति-पत्नि की योजना का हिस्सा था।
अब मैं उनके साथ ससुराल गया। वहाँ पर तो आव-भगत का ढंग बिल्कुल ही बदल गया था। साली-साले जीजाजी-जीजाजी कहते न अघाते थे।


गर्मी का मौसम था। सबने कहा कि आप और भारती मसूरी घूम आओ। साथ में साले जी और उनकी श्रीमती जी भी गए। लेकिन वो घूमने के लिए कम आये थे और हमारा खर्च वहन करने के लिए अधिक।
इस तरह से हमारी गर्मी की छुट्टियों की पिकनिक हुई!

Tuesday, 3 May 2011

"सम्मान की गूँज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


दैनिक अमर उजाला, नैनीताल में 
परिकल्पना एवं हिन्दी साहित्य निकेतन 
सम्मान की गूँज!
3 मई, 2011 के अमर उजाला के 
नैनीताल संस्करण में 
पृष्ठ-7 पर पहले कालम में 
युवा ऊधमसिंहनगर के अन्तर्गत 
उपरोक्त समाचार प्रकाशित हुआ है!

Monday, 25 April 2011

"आमन्त्रण मैं भी दे रहा हूँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


आमन्त्रण "परिकल्पना" से साभार!आप भी आईये और अपने परिजनों को भी साथ लाईये

हिंदी चिट्ठाकारों का महासम्मलेन 


सम्मानित चिट्ठाकार वन्धुओं,

     जैसा की आप सभी को विदित है की आगामी ३० अप्रैल को हिंदी भवन, विष्णु दिगंबर मार्ग, नयी दिल्ली में हिंदी ब्लॉग जगत का वहु प्रतीक्षित परिकल्पना सम्मान-२०१० का महत्वपूर्ण आयोजन है,साथ ही इस अवसर पर  हिंदी चिट्ठाकारिता से संदर्भित  एक वृहद् और वहु आयामी पुस्तक (हिंदी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति)का लोकार्पण भी सुनिश्चित है, परिकल्पना समूह की नयी त्रैमासिक पत्रिका वटवृक्ष तथा  मेरा नया उपन्यास ताकि बचा रहे लोकतंत्र का भी लोकार्पण होना है .......पहली बार इस महा आयोजन में समाज के प्रत्येक क्षेत्र के विशिष्ट अतिथियों का समागम हो रहा है .....

परिकल्पना परिवार की और से यह खुला आमंत्रण हिंदी के समस्त चिट्ठाकारों के लिए है...किन्तु दिल्ली के आसपास के ब्लॉगर गण के लिए विशेष है क्योंकि दिन है शनिवार और दूसरे दिन भी अवकाश , इसलिए कोई बहाना नहीं ....आप भी आईये और अपने परिजनों को भी साथ लाईये .....आप आयेंगे तो आयोजन से जुड़े समस्त सदस्यों का  उत्साह वर्द्धन होगा !  

कार्यक्रम से संवंधित विशेष जानकारी निम्नवत है :

इस कार्यक्रम में विमर्श,परिचर्चाएँ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र होंगे। पूरे कार्यक्रम का जीवंत प्रसारण इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व में किया जाएगा। आप इस कार्यक्रम का आनंद अपने इंटरनेट भी उस दिन ले पायेंगे। जिसकी रिकार्डिंग बाद में भी नेट पर ही मौजूद रहेगी। इंटरनेट पर उपस्थिति को भी आपकी मौजूदगी माना जायेगा। पर यह गिनती दिल्‍ली-एनसीआर और देश से बाहर वालों के लिए ही लागू होगी।  कार्यक्रम का विवरण निम्नवत हैः
दिन व समयःशनिवार 30 अप्रैल 2011, दोपहर 3 बजे से रात्रि‍ 8.30 बजे तक।
रात्रि‍ 8 .30 बजे भोजन।
स्थानःहिंदी भवन , विष्‍णु दिगम्‍बर मार्ग, नई दिल्ली-110002

हिंदी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान-२०१०


उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर हिन्दी ब्लॉगिंग के उत्‍थान में अविस्मरणीय योगदान हेतु उपस्थित 51 ब्लॉगरों को मोमेंटो, सम्मान पत्र, पुस्तकें, शॉल और एक निश्चित धनराशि के साथ सम्मानित करने की योजना है।

सम्मानित किये जाने वाले ब्लॉगरों का विवरण -

1.         वर्ष का श्रेष्ठ नन्हा ब्लॉगर - अक्षिता पाखी, पोर्टब्लेयर
2.         वर्ष के श्रेष्ठ कार्टूनिस्ट - श्री काजल कुमार, दिल्ली
3.         वर्ष की श्रेष्ठ कथा लेखिका - श्रीमती निर्मला कपिला, नांगल (पंजाब)
4.         वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान कथा लेखक - डॉ. अरविन्द मिश्र, वाराणसी
5.         वर्ष की श्रेष्ठ संस्मरण लेखिका - श्रीमती सरस्वती प्रसाद, पुणे
6.         वर्ष के श्रेष्ठ लेखक - श्री रवि रतलामी, भोपाल
7.         वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृतान्त) - श्रीमती शिखा वार्ष्णेय, लंदन
8.         वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृतान्त) - श्री मनोज कुमार, कोलकाता
9.         वर्ष के श्रेष्ठ चित्रकार - श्रीमती अल्पना देशपांडे, रायपुर
10.       वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी प्रचारक - श्री शास्त्री जे.सी. फिलिप, कोच्ची, केरल 
11.       वर्ष की श्रेष्ठ कवयित्री - श्रीमती रश्मि प्रभा, पुणे
12.       वर्ष के श्रेष्ठ कवि - श्री दिवि‍क रमेश, दिल्ली
13.       वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका - सुश्री शमा कश्यप, पुणे
14.       वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार - श्री अविनाश वाचस्पति, दिल्ली
15.       वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका - सुश्री मालविका, बैंगलोर
16.       वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक - श्री संजीव तिवारी, दुर्ग (म. प्र. )
17.       वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय कवि - श्री एम. वर्मा, वाराणसी
18.       वर्ष के श्रेष्ठ गजलकार - श्री दिगम्बर नासवा, दुबई
19.       वर्ष के श्रेष्ठ कवि (वाचन) - श्री अनुराग शर्मा, पिट्सबर्ग अमेरिका
20.       वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका - श्रीमती प्रीति मेहता, सूरत
21.       वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक - श्री दीपक मशाल, लंदन
22.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार - श्रीमती संगीता स्वरूप, दिल्ली
23.       वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार - श्री हिमांशु पाण्डेय, सकलडीहा (यू.पी.)
24-25-26.  वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका – खुशबू/अपराजिता/इशिता, पटना (संयुक्त रूप से)
27.       वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार - श्री जाकिर अली 'रजनीश', लखनऊ
28.       वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार  (आंचलिक) - श्री ललित शर्मा, रायपुर
29.       वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (गायन) - श्री राजेन्द्र स्वर्णकार, बीकानेर, राजस्थान
30-31.  वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार - डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक', खटीमा एवं आचार्य संजीव वर्मा सलिल,       भोपाल (संयुक्त रूप से)
32.       वर्ष की श्रेष्ठ देशभक्ति पोस्ट - कारगिल के शहीदों के प्रति ( श्री पवन चंदन)
33.       वर्ष की श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट - झोलाछाप डॉक्टर (श्री राजीव तनेजा)
34.       वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि - श्री ओम आर्य, सीतामढ़ी बिहार
35.       वर्ष के श्रेष्ठ विचारक - श्री जी.के. अवधिया, रायपुर
36.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग विचारक - श्री गिरीश पंकज, रायपुर
37.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक - श्रीमती नीलम प्रभा, पटना 
38.       वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी - श्री रणधीर सिंह सुमन, बाराबंकी
39.       वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (पुरूष) – डॉ. सुभाष राय, लखनऊ  (उ0प्र0)
40.       वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लॉगर (महिला) - श्रीमती संगीता पुरी, धनबाद
41.       वर्ष के श्रेष्ठ तकनीकी ब्लॉगर - श्री विनय प्रजापति, अहमदाबाद
42.       वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लॉगर - श्री खुशदीप सहगल, दिल्ली
43.       वर्ष के श्रेष्ठ नवोदित ब्लॉगर - श्री राम त्यागी, शिकागो अमेरिका
44.       वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार - श्री मुकेश चन्द्र, दिल्ली
45.       वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लॉगर - श्री ज्ञानदत्त पांडेय, इलाहाबाद
46.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक - श्री सुमन सिन्हा, पटना
47.       वर्ष की श्रेष्ठ महिला ब्लॉगर - श्रीमती स्वप्न मंजूषा 'अदा', अटोरियो कनाडा
48.       वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉगर - श्री समीर लाल 'समीर', टोरंटो कनाडा
49.       वर्ष की श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट - भविष्य का यथार्थ (लेखक - जिशान हैदर जैदी)
50.       वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति - कैप्टन मृगांक नंदन एण्ड टीम, पुणे
51.       वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (हिन्दी चिट्ठाकारी विषयक पोस्ट) - श्री प्रमोद ताम्बट, भोपाल 


हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान-२०११

इसके अंतर्गत ग्यारह ब्लॉगरों के नाम तय किये गए हैं , जिन्हें हिंदी ब्लॉगिंग में 
दिए जा रहे विशेष योगदान के लिए हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान प्रदान किया जायेगा : -

(१)     श्री श्रीश शर्मा (ई-पंडित), तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर  (हरियाणा)
(२)   श्री कनिष्क कश्यप, संचालक ब्लॉगप्रहरी, दिल्ली 
(३)   श्री शाहनवाज़ सिद्दिकी, तकनीकी संपादक, हमारीवाणी, दिल्ली
(४)   श्री जय कुमार झा, सामाजिक जन चेतना को ब्लॉगिंग से जोड़ने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(५)   श्री सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी, महात्मा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा
(६)   श्री अजय कुमार झा, मीडिया चर्चा से रूबरू कराने वाले ब्लॉगर, दिल्ली
(७)   श्री रविन्द्र पुंज, तकनीकी विशेषज्ञ, यमुनानगर (हरियाणा)
(८)   श्री रतन सिंह शेखावत, तकनीकी विशेषज्ञ, फरीदाबाद (हरियाणा )
(९)   श्री गिरीश बिल्लौरे 'मुकुल', वेबकास्ट एवं पॉडकास्‍ट विशेषज्ञ, जबलपुर
(१०) श्री पद्म सिंह, तकनीकी विशेषज्ञ, दिल्ली
(११) सुश्री गीताश्री, नारी विषयक लेखिका, दि‍ल्ली

हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में इनके योगदान को चिन्हित करने के लिए हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन और नुक्‍कड़ डॉट कॉम की ओर से हिन्‍दी ब्‍लॉग प्रतिभा सम्‍मान आरंभ किया गया है।
हिन्‍दी ब्लॉग की दुनिया के हस्ताक्षरों से मिलने और कार्यक्रमों का आनंद उठाने के लिए आपका स्‍वागत है 

Wednesday, 13 April 2011

"13 अप्रैल, सन् 1919-विश्व का एक बड़ा नरसंहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

रविवार13 अप्रैल, सन् 1919, बैशाखी का दिन
भारत के पंजाब प्रान्त का अमृतसर नगर
विश्व के बड़े नरसंहारों में से एक जघन्य काण्ड
रोलेट एक्ट का विरोध करने पर
अंग्रेज़ों की सेनाओं ने भारतीय प्रदर्शनकारियों पर 
गोलियाँ चलाकर बहुत बड़ी संख्या में उनकी हत्या की
अमृतसर के आसपास के गांवों के अनेक किसान 
हिंदुओं तथा सिक्खों का उत्सव ‘बैसाखी’ बनाने शहर में आए थे 

बैशाखी के दिन 13 अप्रैल 1919 को तीसरे पहर 
दस हज़ार से भी ज़्यादा निहत्थे स्त्री, पुरुष और बच्चे 
यहाँ जनसभा कर रहे थे
जलियाँवाला बाग चारों ओर से दीवारों से घिरा हुआ है और इसमें अन्दर जाने के लिए एक बहुत संकुचित गलीनुमा पतला सा रास्ता है।
जनरल आर. ई. एच. डायर ने अपने सिपाहियों को 
आस-पास के घरों औरबाग़ इस तंग रास्ते पर तैनात कर दिया था
बिना किसी चेतावनी के जनरल डायर ने पचास सैनिकों को गोलियाँ चलाने का हुक्म दिया और उन्होंने लगभग 15 मिनट में 1650 गोलियाँ चलाकर निहत्थे स्त्री-पुरुष. बूढ़े और बच्चों को ढेर कर दिया। तंग मार्ग होने के कारण बहुत से लोग तो भीड़ में कुचलकर ही मारे गये।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार इस गोलीकाण्ड में 
400 लोग मारे गये थे और 1200 लोग घायल हुए थे। 
जिन्हें कोई सरकारी चिकित्सा उपलब्ध नही कराई गयी थी!
भारत के स्वतन्त्र होने के बाद अमेरिकी डिज़ाइनर बेंजामिन पोक ने 
जलियाँवाला बाग़ स्मारक का डिज़ाइन तैयार किया, 
जिसका उदघाटन 13 अप्रैल 1961 को किया गया।
-0-0-0-
मैं पिछले वर्ष पाँच मार्च, 2010 को अमृतसर गया था।
देखिए जलियाँवाला बाग मेरे कैमरे की नज़र से-
यह है प्रवेश द्वार के बाद अमर ज्योति
मरे साथ हैं मेरे मित्र स.गुरदयाल सिंह (स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी)
काली जैकेट में एच.पी.निर्धन और अन्य लोग।
 लोगों पर गोलियाँ यहाँ से दागीं गईं थी।
 हताहत लोगों का पोर्ट्रेट
 शहीदी कुआँ
गोलियों से जान बचाने के लिए लोग इस कुएँ में गिर पड़े थे,
जिसमें से 120 शव निकाले गये थे।
 शहीदों की याद में बनवाया गया स्मारक!
गोलियों के निशान आज भी 
इस बर्बर गोलीकाण्ड की गवाही दे रहे हैं!
 यहाँ भी गोलियों के कुछ निशान मौजूद हैं!
 मैं 92 वर्ष पूर्व आज के दिन शहीद हुए 
सभी स्वनाम धन्य शहीदों को अपनी श्रद्धाञ्जलि समर्पित करता हूँ!

Wednesday, 6 April 2011

ब्लॉगर मीट में जिसका नाम है FIND RAJASTHAN


जो ब्लॉगर 30 अप्रैल को दिल्ली पधार रहे हैं।

उनसे निवेदन है कि रानी जिला पाली राजस्थान मैं दिनांक 1 व 2 मई को आयोजित होने वाले 
ब्लॉगर मीट में भी भाग लेने के लिए 
अपना अमूल्य समय जरूर निकालें!

आप सभी आमंत्रित हैं
रानी जिला पाली राजस्थान मैं दिनांक 1 व 2 मई को आयोजित होने वाले ब्लॉगर मीट में जिसका नाम है FIND RAJASTHAN

इसमें प्रथम दिवस में आने के बाद आराम विश्राम के पश्चात परिचय सत्र का आयोजन किया जायेगा, इसके पश्चात रात्रि के समय एक गोष्ठी होगी जिसमे कुछ ज्वलंत मुद्दों पर आप सभी ब्लागरों से चर्चा की जायेगी

दुसरे दिन नजदीकी भ्रमण स्थान रणकपुर जैन मंदिर जो की विश्व प्रशिद्ध है का भ्रमण किया जायेगा .
नजदीकी रेलवे स्टेशन रानी और फालना है जयपुर दिल्ली और मुंबई तक से सीधी ट्रेन सुविधा है साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश से भी कई ट्रेने चलती है
आप केवल अपना स्थान बता दीजिये पूर्ण ट्रेन की समय सारणी भिजवा दी जाएगी

कृपया कर आने वाले ब्लॉगर अपना नाम दिनांक 25 अप्रेल तक दे देवें ताकि कार्यक्रम की रुपरेखा प्रकाशित हो सके
संपर्क करें bloggermeet@naradnetwork.in
tarun@naradnetwork.in
Mobile No. 9251610562

JAI HIND

Friday, 25 March 2011

"सजने लगा है माँ पूर्णागिरि का दरबार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

होली के समाप्त होते ही माँ पूर्णागिरि का मेला प्रारम्भ हो जाता है और भक्तों की जय-जयकार सुनाई देने लगती है! 
मेरा घर हाई-वे के किनारे ही है। अतः साईकिलों पर सवार दर्शनार्थी और बसों से आने वाले श्रद्धालू अक्सर यहीं पर विश्राम कर लेते हैं।
यदि आपका कभी माँ पूर्णागिरि के दर्शन करने का मन हो तो सबसे पहले आप खटीमा से 7 किमी दूर पूर्णागिरि मार्ग पर चकरपुर में बनखण्डी महादेव के प्राचीन मन्दिर भोलेबाबा के दर्शन अवश्य करें।
मान्यता है कि शिवरात्रि पर रात में भोले बाबा के साधारण से दिखने वाले पत्थर का रंग सात बार बदलता है।
इसके बाद आप रास्ते में पढ़ने वाले बनबसा कस्बे में पहुँचें तो भारत-नेपाल की सीमा भी देख लें। 
यहाँ शारदा न नदी पर बना एक विशाल बैराज है। जिसके पार करने पर आप नेपाल की सीमा में प्रविष्ट हो जाएँगे।
पुल के चौंतीस पिलर्स (गेट) हैं उनको पार करने के उपरान्त आपको भारत की आब्रजन और सीमा चौकी पर भी बताना होगा कि हम नेपाल घूमने के लिए जा रहे हैं।
और अगर समय हो तो नेपाल के शहर महेन्द्रनगर की विदेश यात्रा भी कर लें।
बनबसा के आगे पूर्णागिरि जाने के लिए आपको अन्तिम मैदानी शहर टनकपुर आना होगा। 
रास्ते में आपको दिव्य आद्या शक्तिपीठ का भव्य मन्दिर भी दिखाई देगा। आप यहाँ पर भी अपनी वन्दना प्रार्थना करना न भूलें।
यहाँ से 4 किमी दूर जाकर पहाड़ी रास्ते की यात्रा आपको पैदल ही करनी होगी मगर आजकल जीप भी चलने लगीं है इस मार्ग पर। जो आपको भैरव मन्दिर पर छेड़ देंगी। भैरव मन्दिर के बाद तो  कोई सवारी मिलने का सवाल ही नहीं उठता हैा। अपना भार स्वयं उठाते हुए यहाँ से आप माता के दरबार तक 3 किमी तक पैदल चलेंगे।
1500 मीटर चलने के बाद आपको टुन्यास नामक आखरी पड़ाव मिलेगा।
 यहाँ पर आप अपने बाल-गोपाल का मुण्डन संस्कार भी करा सकते हैं।
उसके बाद आपको नागाबाड़ी में पहाड़ी रास्ते के दोनों ओर बहुत से नागा साधुओं के दर्शन होंगे।
    थोडी दूर और चलने के बाद माता का पक्का पहाड़ आ जाएगा और सीढ़ियों से चलकर आपको दरबार तक जाना पड़ेगा।
    और यह है माता के मन्दिर का पिछला भाग। 
इसके साथ ही सीढ़ियाँ माता के मन्दिर की ओर मुड़ती हैं और माता का दरबार आपको दिखाई दे जाएगा।
    यदि भीड़ कम हुई तो शीघ्र ही माता के दर्शनों का लाभ भी मिल जाएगा।
यही वो छोटा सा मन्दिर है जिसके दर्शनों के लिए आप इतना कष्ट उठा कर यहाँ तक आयेंगे। मगर इसकी मान्यताएँ बहुत बड़ी हैं।
नीचे है माता के दरबार से लिया गया पर्वतों का मनोहारी चित्र। 
जिसमें नीचे शारदा नदी दिखाई दे रही है।
आप जिस रास्ते से माता के दर्शन करने के लिए आये थे अब उस रास्ते से वापिस नहीं जा पाएँगे क्योंकि मन्दिर से नीचे उतरने के लिए अलग से सीढ़िया बनाई गईं हैं।
वापस लौटते हुए आप झूठे के चढ़ाए हुए मन्दिर के भी दर्शन कर लें। 
यहाँ आपको यह भोला-भाला नन्दी और कुष्ट रोगियों के परिवार खाना पकाते खाते हुए भी नजर आयेंगे।
आपकी श्रद्धा हो तो आप दान-पुण्य भी कर सकते हैं।
माता पूर्णागिरि आपकी मनोकामनाएँ पूर्ण करें।

Thursday, 10 March 2011

"सोये हुए बिल्ली-कुत्ते का चित्र बनाया करो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


    आज मुझे विख्यात चित्रकार श्री हरिपाल त्यागी का एक संस्मरण याद आ रहा है! यह सन् 1989 की घटना है मगर ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो।

उन दिनों त्यागी जी दाढ़ी नहीं रखते थे। बाबा नागार्जुन उन्हीं के मुहल्ले सादतपुर में रहते थे और खटीमा प्रवास पर आए हुए थे। वे राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में कार्यरत प्रो. वाचस्पति के यहाँ ठहरे थे। प्रो. वाचस्पति मेरे अभिन्न मित्रों में थे। प्रतिदिन की भाँति मैं जब प्रो. साहब से मिलने उनके निवास पर गया तो बाबा नागार्जुन की चारपाई पर बैठे हुए एक सज्जन बाबा से अन्तरंग बाते कर रहे थे।
मैंने वाचस्पति जी से इनके बारे में पूछा तो पता लगा कि ये मशहूर चित्रकार और पत्र-पत्रिकाओं कवर डिजाइनर हरिपाल त्यागी हैं! अब मैं त्यागी जी से मुखातिब हुआ तो पता लगा कि यह मेरे मूलनिवास नजीबाबाद के पास के ही महुआ ग्राम के निवासी हैं। मैंने त्यागी जी से कहा कि महुआ के तो मेरे नामराशि रूपचन्द त्यागी मूर्ति देवी सरस्वती इण्टर कालेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता थे। जिन्होंने मुझे इण्टर में अंग्रेजी पढ़ाई है और उनका भतीजा अशोक कुमार त्यागी मेरा क्लास-फैलो था। इस पर त्यागी जी ने बताया कि वो उनके भतीजे हैं और अशोक मेरा पोता है।
हरिपाल त्यागी खटीमा में लगभग एक सप्ताह रहे। मेरे साथ बाबा, त्यागी जी और प्रो.वाचस्पति का परिवार नेपाल के शहर महेन्दनगर भी घूमने गये। एक बार मेरे निवास/विद्यालय में कविगोष्ठी हुई। जिसमें बाबा के साथ त्यागी जी, बल्लीसिंह चीमा, गम्भीर सिंह पालनी, जवाहर लाल, दिवाकर भट्ट, जसराम सिंह रजनीश, ठा.गिरिराज सिंह और स्थानीय कवियों ने काव्य पाठ किया।
वह बात तो रह ही गई जिसके लिए यह संस्मरण लिखा है। मैं एक दिन प्रो. वाचस्पति के यहाँ बातें कर रहा था तभी त्यागी जी ने मुझे घूर कर देखा। मैंने सोचा कि त्यागी जी को मेरी को बात बुरी लग गई होगी इसलिए आज वो मेरी बातों में रुचि नहीं ले रहे है।
लगभग दो मिनट बाद त्यागी जी ने मुझे एक स्कैच देते हुए कहा कि यह आप ही हैं। (संयोग से वह चित्र मुझे इस समय मिल नहीं रहा है) काले स्कैच पैन से बना यह चित्र तो कमाल का था। मैंने घर आकर जब इसे दिखाया तो मेरे छोटे पुत्र विनीत की भी कला में रुचि जाग्रत हुई।
अगले दिन जब त्यागी जी मेरे कार्यालय में आये तो विनीत ने (जो कि उस समय कक्षा 5 का छात्र था) त्यागी जी का एक कार्टूननुमा चित्र बना कर उन्हें भेंट किया। इस पर त्यागी जी बहुत जोर से हँसे। विनीत को बहुत प्यार किया और कहा कि पहले सोते हुए कुत्ते बिल्ली का चित्र बनाया करो!