आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।।
आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती, कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती, गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।।
हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान से, छेड़ दो वीणा मधुर, जग मस्त हो सुर-तान से, माँ तुम्हारी आरती में ही, मेरा संसार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। |