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Thursday, 4 February 2010

"माँ तुम्हारी आरती में ही मेरा संसार है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

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आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है।
आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।।

आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती,
कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती,
गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है।
आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।।

हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान से,
छेड़ दो वीणा मधुर, जग मस्त हो सुर-तान से,
माँ तुम्हारी आरती में ही, मेरा संसार है।
आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।।