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Friday, 14 August 2009

‘‘हिन्दू से ईसाई बनने बनने का राज क्या है?’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आज से लगभग 32 वर्ष पुरानी बात है। मेरे गृह जनपद के एक व्यक्ति खटीमा आकर बस गये। यहीं पर उन्होंने एक रिश्तेदार डाक्टर के यहाँ कुछ दिन रह कर डाक्टरी सीख ली और निकट के गाँव में अपना चिकित्साभ्यास शुरू कर दिया। गुजर-बसर ठीक-ठाक होने लगी।
उस गाँव में एक पादरी परिवार भी रहता था। उसने इस व्यक्ति के यहाँ आना जाना शुरू कर दिया।
नित्य प्रति पादरी इसे बाइबिल की बातें बताने लगा। यह डाक्टर भी उसकी बातें रस लेकर सुनने लगा।
अब पादरी ने उसे किसी ईसाई सम्मेलन में ले जाने के लिए राजी कर लिया।
4 दिनों के बाद जब यह डाक्टर लौट कर अपने घर आया तो सिर से चोटी और कन्धे से जनेऊ गायब था। यह पूरी तरह ईसाइयत के रंग में रंग चुका था।
अब इसने डाक्टरी का रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र फाड़ कर फेंक दिया था। इसका एक ही काम था गाँव-गाँव जाकर ईसाईयत के पर्चे बाँटना।
इसको इस काम के लिए उस समय तीन हजार रुपये प्रति माह मिलता था।
आज इसने अपना मकान बना लिया है। दोनों पुत्रियों और पुत्र का विवाह भी ईसाई परिवारों में कर दिया है।
वर्तमान समय में विदेशी ईसाई मिशन इसे दस हजार रुपये प्रति माह दे रहा है।
अपने घर में यह हर रविवार (सन-डे) को दरबार लगाता है। आदिवासी लोगों के भूत-प्रेत को उतारने का ढोंग करता है। हजारों रुपये का चढ़ावा प्रति रविवार इसके घर पर आता है।
अब तक यह सैकड़ों भोले-भाले आदिवासियों को ईसाई धर्म में दीक्षित कर चुका है।
अब समझ में आ गया है कि ईसाई मिश्नरी हमारे देश के भोले-भाले लोगों को लोभ देकर ईसाई बनाते हैं।

19 comments:

  1. चिंतनीय मुद्दा यह भी है कि .. यदि भोले भाले लोगों को हम संरक्षण दे पाते .. तो वह क्‍यूं इसाई बनते ?

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  2. आपने बिल्कुल सच्चाई का ज़िक्र किया है! भोले भाले लोगों को निशाना बनाया जाता है और उनका सर घुमा दिया जाता है और इसी तरह से लाखों लोग इस चक्कर में पर जाते हैं और अपना मज़हब बदल लेते हैं! मालूम नहीं ऐसे लोगों का अपना दिमाग क्यूँ नहीं चलता? क्यूँ अपने अक्ल से काम नहीं लेते? न जाने कितने लोगों को इसी तरह से गुमराह किया गया है और ईसाई बन गए हैं!

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  3. शास्त्रीजी

    अतियन्त चिन्तनिय विषय है, जैसा की आपने लिखा धन बल के माध्यम से यदि धर्म परिर्वतन कराया जा रहा है तो अनैतिक है,एवम किसी भी धर्म,समाज, जाति को कोई हक नही बनता है की इस तरह की अनैतिकता को अपनाये।

    अगर आपको इस तरह की पक्की जानकारी है तो कानून की साहयता लि जा सकता है।

    गुजरात महाराष्ट्र आदी राज्यो मे ऐसे कई मामलो मे हस्तक्षेप कर घर्म परिवर्तन को रोका गया है।

    हमे जागरुकता बनाए रखनी होगी नही तो घर मे ही चोरी हो जाएगी और देखते कहते ही रहना पडेगा।

    भारतीय सस्कृती के कल्याण के लिऍ अच्छे विषय पर आज बात हुई -आभार

    हे प्रभु यह तेरापन्थ

    मुम्बई टाईगर

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  4. shastri ji saavdhan jamana dharm virodhiyon ka hai unhone aapko shriraam sena ya anya kisi sangathan ka karykarta ghoshit kar dena hai.is baat ko to bharat me lagbhag sabhi jaante hain.ki dharm parivartan kis tarah hota hai.jo anjaan hain unke liye aapne acchha lekh likha hai.dhanyavaad .tensionpoint.blogspot.com.

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  5. शास्त्री जी, सिस्स्स्स्स,
    धीरे बोलो, आप पर साम्प्रदायिकता भड़काने का आरोप लगाया जा सकता है, मत भूलो कि आप हिन्दू है, और इस देश में हिन्दुओ को इस तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है !

    आपको जन्माष्टमी की बधाई !

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  6. इसका मुख्य कारण हम उनको अपने साथ नहीं रख सके मिशनरी ने इसका लाभ ले लिया

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  7. बहुत चिन्तनीय मुद्दा है पैसे के लालच मे लोग धरम को भी बेचने लगे हैं।
    जन्म अश्टनी की बधाइ

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  8. कट्टरता पैदा करनेवालें तत्‍वों का वि‍रोध कि‍या जाना चाहि‍ए, लेकि‍न कट्टरता के माध्‍यम से नहीं, बल्‍ि‍क अपने धर्म में सहि‍ष्‍णुता और सामाजि‍कता पैदा करके:)

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  9. सार्थक लेख, इस प्रकार की चंगई इलाहाबाद डिम्‍ड यूनीवर्सिटी से कुलपति भी कर रहे है और लाखो कमा रहे है।

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  10. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!
    ---
    INDIAN DEITIES

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  11. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय श्री कृष्ण!
    ---
    INDIAN DEITIES

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  12. bahut hi chintniya vishay hai ..........magar jab tak iske khilaf kadam na uthaya jaye aur logo ko jagruk na kiya jaye tab tak kuch nhi ho sakta........shayad aapke lekh se aisa kuch ho .

    janmashtmi aur swatantrata diwas ki hardik shubhkamnayein.

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  13. aankhein kholne bhar ki deri hai bas shastri ji.
    atyant sundar vishay ko chhua aapne.
    shubhkaamnaayein.

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  14. बेहद चिन्तनीय विषय्!! ईसाई मिशनरियों के इस प्रकार के कृ्त्य के बारे में तो लगभग प्रत्येक व्यक्ति भली भान्ती परिचित ही है। वैसे इनके चक्कर में अधिकतर वो ही लोग फंसते हैं जो कि निहायत गरीब हैं या जिन्हे समाज ने हाशिये पर धकेल रखा है।

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  15. विषय तो चिंताजनक है, लेकिन खाली चिंता करने से क्या होगा. हमें इसके कारणों में भी जाना चाहिए. आज भी हमारे देश में २२% लोग गरीबी की रेखा से नीचे रहते हैं. उनको टारगेट बनाना आसान तो है. आखिर कहाँ तक उनको बहकाए जाने से रोक सकेंगे. हम सब को मिलकर सोचना होगा.

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  16. चितंनीय विषय है...

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  17. डॉ. रूपचंद्रजी मैं आपको इस ब्लॉग के लिए धन्यवाद कहना चाहता हूँ. इस ब्लॉक के माध्यम से मैं सभी रीडर्स का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ.

    मेरा विषय है - बहाई धर्म -
    आज हमारे देश में एक और नए धर्म का प्रभाव काफी बढ़ता जा रहा है, यह धर्म है बहाई धर्म, इस धर्म का नबी एक बहाउल्लाह नाम का व्यक्ती था जिसने अपने आप को भगवान विष्णु का अवतार बताया है, और खुद को कलकी अवतार कहता है. इस धर्म की स्थापना 1830 - 40 के दशक में ईरान में हुई थी और 40 साल पहले कुछ ईरानियों ने यहा आकर भारत देश में इसकी नीव डाली. मैं मेरे सभी भाईयों को बतलाना चाहता हूँ कि यह धर्म नहीं एक राजनीतिक संघटन है और यह हमारे धर्म और हमारे देश दोनों के लिए हानिकारक है. क्या आप जानते है कि इस धर्म के अनुयायी 1963 के आस-पास सिर्फ 1000 जितने थे, फिर अचानक इन लोगों ने जोर पकडा और हिन्दु धार्मिक चिन्हों का उपयोग करके और भोली भाली जनता को धोके के साथ बहाई बना डाला. आज 2009 में हिन्दुस्तान में 20 लाख बहाई हैं और यह सभी लोग बहाई बनने से पहले हिन्दु थे.
    इनकी वेबसाईट है - http://www.bahai.in/

    और यह लोग किस चतुरता से हिन्दुओं को बहाई बनाते हैं, इस बारे में अधिक पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें -
    http://www.h-net.org/~bahai/bhpapers/vol2/india2.htm

    मेरा आप सभी लोगों से निवेदन है कि इस से सावधान रहें.

    अगर इस लेख का
    http://www.h-net.org/~bahai/bhpapers/vol2/india2.htm
    अनुवाद हिन्दी भाषा में हो जाए तो सभी भारतीय शायद इन लोगों के धोके से बचे रह सकते हैं -

    धन्यवाद

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  18. विदेश से करोडों रुपया आ रहा है। अब भारत ही ऐसा देश बच गया है जहां ईसाइयत फैलाई जा सकती है।एशिया के अन्य देशों में या तो इस्लाम है या ईसाई और चीन में तो घास नहीं मिलने की:}

    और फिर, जन जातियों को रुपया मिल रहा है, सुख-सुविधाएं मिल रही हैं तो क्यों न वे उस धर्म को अपनाएं!!!!! दोश किसका है?????

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  19. चिंतनीय विषय तो है....पर उपाय क्या है..?

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