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Thursday, 9 June 2011

"माता पूर्णागिरि की यात्रा-फोटो फीचर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

शनिवार 4 जून, 2011 को हम लोग 
माता पूर्णागिरि के दर्शनों के लिए निकल पड़े।
घर के सामने पूर्णागिरि के भक्तों का हुजूम था!
सुबह 6 बजे सड़क का नजारा
रास्ते में चकरपुर गाँव मिला!
इसके बाद 1 किमी आगे
वनखण्डी महादेव का मन्दिर मिला,
यहाँ भी पूर्णागिरि के यात्रियों का जत्था था!
यहाँ बाबा जी से आशीर्वाद लिया
 
 
 
 
यहाँ रात में शिव की पिण्डी
7 बार रंग बदलती है! 
अब यहाँ से टनकपुर की ओर आगे बढ़े!
टनकपुर से 12 किमी आगे
 आद्या महाकामेश्वरी शक्तिपीठ के दर्शन किये!
 
इसके बाद ठुलीगाड़ नामक स्थान पर पहुँचे!
यहाँ से पैदल यात्रा शुरू करनी थी!
रास्ता दुर्गम चढ़ाई वाला था!
 दूर पर्वत पर शिखर पर
माता पूर्णागिरि का मन्दिर दिखाई दे रहा था!
नीचे शारदा नदी 
कलकलनिनाद करती हुई बह रही थी!
 कुछ दूर चलने पर एक भाई सीना पकड़े बैठे थे!
आखिर मैं भी सुस्ताने के लिए बैठ ही गया!
 
कुछ दूर आगे जाने पर यह नन्दी भी सुस्ताता हुआ मिला!
अब टुन्यास आ गया था!
इसके बाद नाई बाड़ा शुरू हुआ!
यहाँ मुण्डन संस्कार हो रहे थे!
यहाँ से माता जी का पहाड़ शुरू होता है!
कुछ दूर चलने पर सीढ़िया भी आ गईं थी!
यहाण दर्शनार्थियों की भारी भीड़ थी
और मैंने माता जी के मन्दिर के
पिछले भाग का फोटो ले लिया!
अब माता जी का दरबार सामने था!
माता पूर्णागिरि के दर्शन करके मन प्रसन्न हो गया
और मैं सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा! 
रास्ते में झूठे मन्दिर के भी दर्शन किये! 
 कुछ सुन्दर दृश्यों को कैमरे में भी कैद किया!
 
 
यहाँ से शारदा नदी ऐसी नजर आ रही थी!
 
 अब भूख बहुत जोर से लगी थी!
 सबने प्रेम से भोजन किया!
 बचा हुआ खाना 
इन महात्मा जी को दे दिया!
 इस प्रकार से हमारी पूर्णागिरि की यात्रा 
सम्पन्न हुई!
आपकी जानकारी के लिए !
पूर्णागिरि माता का मन्दिर चम्पावत जिले में 
टनकपुर से 25 किमी दूर है!
खटीमा से मन्दिर की दूरी 50 किमी है!
दिल्ली से यह 350 किमी
मुरादाबाद से 200 किमी
बरेली से 135 किमी तथा
रुद्रपुर से 130 किमी दूर है!

33 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

पावन यात्रा की सुंदर चित्रमयी झांकी .....आभार

श्रीराम बिस्सा said...

मजा आ गया "जय माता दी"

मनोज कुमार said...

इस पोस्ट में एक खूबी यह है हम पल-पल आपके साथ थे, ऐसा लगा।
** आप फोटो बहुत अच्छी उतारते हैं, चाहे कविता हो चाहे कैमरा।
*** आप एक अच्छे गाइड हैं।

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" said...

वाह जी वाह ! एक साथ दो-दो पुण्य कमा लिए आपने . खुद तो यात्रा क़ी ही और आपने सबको भी सचित्र यात्रा करा दी . सारे परिवार ने आपकी प्रस्तुति देखी . बहुत - बहुत धन्यवाद . आभार . .... और जोर से .... बोलता हूँ ... जय माता क़ी .

दर्शन लाल बवेजा said...

सुंदर चित्रमयी झांकी .....आभार

Kunwar Kusumesh said...

पावन यात्रा की सुंदर चित्रमयी झांकी .....आभार

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

सभी फ़ोटो अच्छे लगे,
रंग बदलने वाली पिण्डी से मिलना पडेगा,
झूठे मन्दिर का चक्कर समझ नहीं आया।

रावेंद्रकुमार रवि said...

बहुत बढ़िया!
पर यह पोस्ट तो उच्चारण पर लगनी चाहिए थी!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर चित्र! आप ने हमारी भी यात्रा करा डाली।

shikha varshney said...

यात्रा की सुन्दर झांकी. आभार.

वीना said...

चलिए आपके साथ हमने भी माता के दर्शन कर लिए ...पर इस झूठे मंदिर के बारे में जरूर बताइएगा...मुझे पता नहीं है....

Dilbag Virk said...

ऐसे लगा जैसे पूर्णागिरी की यात्रा खुद ने की हो
पूर्णागिरी के दर्शन करवाने के लिए आपका धन्यवाद
"जय माता दी"

kshama said...

Aapne yatra to kara dee...ab iska puny bhee aap hee ko haasil!!
Bahut sundar chitr hain sabhee!

Vaanbhatt said...

पंतनगर से १९९० में की गयी यात्रा की याद दिला दी आपने...फोटो फीचर से सारे दृश्य पुनः उभर आये...ये यात्रा हम लोगों ने साइकिल से की थी...

शालिनी कौशिक said...

bahut achchha laga.ham to aaj tak keval poornagiri ka naam hi sunte aa rahe the aaj aapne hame darshan kara kar hamara jeevan dhanya kar diya.aaj apne blog jagat se jude hone par garv mahsoos ho raha hai.aabhar.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

पूर्णागिरी मैया की जय!

वाणी गीत said...

तस्वीरों के माध्यम से पूर्णागिरी की यात्रा कर आये हम भी ...
सभी तस्वीरों के शारदा नदी का चित्र मनोरम है ...
आभार !

Akhilesh said...

ji mata ji k itne sunder drisyo ko post karne k liye dhanyawaad !!! maa aapka kalyaan karein!!

Babli said...

मनमोहक और ख़ूबसूरत चित्रों से सुसज्जित प्रस्तुती! ऐसा लगा जैसे मैं भी पूर्णागिरी घूमकर आ गयी आपके तस्वीरों के माध्यम से! बहुत अच्छा लगा!

ajit gupta said...

बड़ी अच्‍छी जानकारी। आभार।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

यह पावन यात्रा हमने भी चित्रों के माध्यम से कर ली ..आच्छी जानकारी देती पोस्ट .

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

aisa lagaa saakshaat darshan huye ho!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वंदना जी का सन्देश --

आपकी रचना यहां भ्रमण पर है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
http://tetalaa.blogspot.com/

वन्दना said...

बहुत ही सुंदर चित्रमयी झांकी .

Maheshwari kaneri said...

सुंदर चित्रमयी झांकी ।तस्वीरों के माध्यम से पूर्णागिरी की यात्रा कर आये हम भी ...बहुत अच्छा लगा!.....आभार

संगीता पुरी said...

सुंदर चित्रमयी झांकी को देखते ऐसा लगा कि हमने भी यात्रा कर ली .. आपका आभार !!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

♥ झूठे का चढ़ाया हुआ मन्दिर ♥

माँ पूर्णागिरि के महात्मय को सुनकर
प्राचीन समय में एक सेठ जी ने माता के दरबार में आकर
पुत्र की कामना की और प्रण किया कि
मेरे घर मे पुत्र का जन्म होगा तो
माता को सोने का मन्दिर भेंट करूँगा!...
--
इसकी कथा मेरे ब्लॉग मयंक पर है!

Dr_JOGA SINGH KAIT "JOGI " said...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)JI AAPKI PAVITR YATRA KA CHITRMAYA VARANAN DEKHKAR LAGA KI M KHUD AAPAKE SAATH HI HUN MAATA JI KA ASHIEWAD AAP PAR,DEKHANE WALO PRA,SADAIV BANA RAHE ,PAIDAL YATRIYON KE CHARANO M SHAT-SHAT NAMAN

Vivek Jain said...

बहुत अच्छा लगा माता के दर्शन आपके साथ करके,
साभार- विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Rachana said...

aapka dhnyavad .aap ke sath hum ne bhi yatra kar li ma ke drshn kr ke man prasan huaa.
saader
rachana

Rahul Singh said...

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच उभर आया सीमेंट-कांक्रीट और लोहे का जंजाल.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कदम दर कदम सचित्र वर्णन दिखा कर आपने हम को भी यात्रा करने का सुख दिया.

बहुत बहुत धन्यवाद सर!

सादर

veerubhai said...

हमने भी यात्रा को साक्षी भाव से देखा .झूठे का मंदिर अनोखा लगा .ये भारत देश भी अनोखा है यहाँ मध्य प्रदेश में एक मंदिर स्वान -प्रभु (अपने कुत्ता भाई का भी है ).अच्छा छायांकन है .बधाई .