समर्थक

Sunday, 29 December 2013

"कैसे उतरें पार?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लिए पुरानी अपनी नौका, 
टूटी सी पतवार,
बताओ कैसे उतरें पार?

देख रवानी लहरों की, 
हमने मानी है हार,
बताओ कैसे उतरें पार?

4 comments:

  1. अनुभवी-ज्ञानी हो आप जैसा खेवनहार, तो ले जाएगा टूटी नैया को भी उसपार.

    ReplyDelete
  2. पाण्डेय जी के कथन से पूर्णतः सहमत हूँ...

    ReplyDelete
  3. क्या बात है शास्त्री जी ! आप भी हाई टेक हो गए ! शुभकामनायें .

    ReplyDelete
  4. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (1 जनवरी, 2014) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

    ReplyDelete

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।